या तो हमसे यारी रख
या फिर दुनियादारी रख
ख़ुद पर पहरेदारी रख
अपनी दावेदारी रख
जीने की तैयारी रख
मौत से लड़ना जारी रख
लहजे में गुलबारी रख
लफ़्ज़ो में चिंगारी रख
जिससे तू लाचार न हो
इक ऎसी लाचारी रख
No more noisy, loud words from me---such is my master's will. Henceforth I deal in whispers.
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Wednesday, July 1, 2009
तेरा ही तो हिस्सा हूँ 'विज्ञान व्रत'
तेरा ही तो हिस्सा हूँ
ये तू जाने कितना हूँ
अपने हाथों हारा हूँ
वरना किसके बस का हूँ
ख़ुद को ही खो बैठा हूँ
मैं अब क्या खो सकता हूँ
जब से अपने जैसा हूँ
सब कहते हैं, धोखा हूँ
आमादा हूँ जीने पर
और अभी तक ज़िंदा हूँ!
ये तू जाने कितना हूँ
अपने हाथों हारा हूँ
वरना किसके बस का हूँ
ख़ुद को ही खो बैठा हूँ
मैं अब क्या खो सकता हूँ
जब से अपने जैसा हूँ
सब कहते हैं, धोखा हूँ
आमादा हूँ जीने पर
और अभी तक ज़िंदा हूँ!
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