अपनी-अपनी गति से
लुढ़कती हैं चीज़ें
अपनी-अपनी दिशा में
एक गति सूर्य की है
एक गति पृथ्वी की
एक गति रॉकेट की है
एक
बैलगाड़ी की
जेट से गिरते
गोले की भी
अपनी एक गति है
और
टुकड़ों में
बिखरती जानों की
और ऎसा भी नहीं
कि अपनी गति में
चीज़ें
आगे को ही
बढ़ती हैं
यद्यपि भ्रम
सबको यही है
न यह ही सही है
कि गति में रहकर
चीज़ें बढ़ती ही हैं
यह भी भ्रम ही है
पतन की भी
अपनी एक गति है
और अपनी एक दिशा
और एक दिशा
संघर्ष की
और कई बार
जो बिल्कुल
गतिहीन लगता है
वही आगे बढ़ता है।
No more noisy, loud words from me---such is my master's will. Henceforth I deal in whispers.
Showing posts with label रुस्तम. Show all posts
Showing posts with label रुस्तम. Show all posts
Thursday, April 16, 2009
Subscribe to:
Posts (Atom)
रुद्राष्टाध्यायी का आध्यात्मिक और आधिभौतिक अर्थ
रुद्राष्टाध्यायी का आध्यात्मिक और आधिभौतिक अर्थ एक बात शुरुआत में स्पष्ट करना उपयोगी है— रुद्राष्टाध्यायी केवल भगवान शिव की स्तुति नहीं ह...
-
हम घूम चुके बस्ती-वन में इक आस का फाँस लिए मन में कोई साजन हो, कोई प्यारा हो कोई दीपक हो, कोई तारा हो जब जीवन-रात अंधेरी हो इक बार कहो तुम म...
-
जी करता है, कुछ लिखूं, लिखता ही चला जाऊं, जीवन एक अबूझ पहेली, इसी बारी सुलझाऊं ! कैसे सृजन हुआ सृष्टि का, कैसे बने सितारें ? कैसे बने चाँद औ...
-
साँस चलती है तुझेचलना पड़ेगा ही मुसाफिर! चल रहा है तारकों कादल गगन में गीत गाताचल रहा आकाश भी हैशून्य में भ्रमता-भ्रमाता पाँव के नीचे पड़ीअचल...