Showing posts with label नवनीत शर्मा. Show all posts
Showing posts with label नवनीत शर्मा. Show all posts

Monday, April 27, 2009

बदल दी चोट खाए बाज़ुओं ने धार चुटकी में 'नवनीत शर्मा'

बदल दी चोट खाए बाज़ुओं ने धार चुटकी में
छिना था मेरे हाथों से जहाँ पतवार चुटकी में
उन्हें तुमने कहा था एक दिन बेकार चुटकी में
चढ़े आते हैं टी.वी. पे जो अब फ़नकार चुटकी में
जगाई याद की तूने अजब झंकार चुटकी में
लो मेरे दिल के फिर से बढ़ गए आज़ार चुटकी में
मोहब्‍बत, चैन या एतमाद की मंजिल नहीं मुश्किल
मेरे कदमों को तू बख़्शे अगर रफ़्तार चुटकी में
न माथे पर शिकन कोई, न दिल में हूक, हैरत है
यही हैं लोग क्‍या, जिनका छिना घर-बार चुटकी में
यह दुनिया हाट हो जैसे, है बिकवाली ज़रूरत की
कि सर पर से हथेली ले गई दस्‍तार चुटकी में
अजब उलझन का ये मौसम कि जानम भी सियासी है
कभी इन्कार चुटकी में, कभी इक़रार चुटकी में
सुनो, जागो, उठो, देखो कि बरसों बाद मौका है
अभी तुमको गिराने हैं कई सरदार चुटकी में
'नहीं' कहना हुनर ऐसा जिसे हम सीख न पाए
जो हमसे खाल भी माँगी, कहा, 'सरकार! चुटकी में'
अकेले जूझना है जीस्‍त नदिया, मौत सागर से
यहाँ कोई नहीं ले जाए जो उस पार चुटकी में
है बहरो-वज़्न कैसा ये तो द्विज उस्ताद ही जाने
कहा सतपाल ने तो कह दिए अश्‍आर चुटकी में

अनकही का जवाब है प्यारे 'नवनीत शर्मा'

अनकही का जवाब है प्यारे
ये जो अंदर अज़ाब है प्यारे
आस अब आस्माँ से रक्खी है
छत का मौसम ख़राब है प्यारे
अश्क, आहें ख़ुशी ठहाके भी
ज़िंदगी वो किताब है प्यारे
रोक लेते हैं याद के हिमनद
दिल हमारा चिनाब है प्यारे
प्यार अगर है तो उसकी हद पाना
सबसे मुश्किल हिसाब है प्यारे
कट चुकी हैं तमाम ज़ंजीरें
फिर भी ख़ाना ख़राब है प्यारे
कौन तेरा है किसका है तू भी
ऐसा कोई हिसाब है प्यारे!

रुद्राष्टाध्यायी का आध्यात्मिक और आधिभौतिक अर्थ

  रुद्राष्टाध्यायी का आध्यात्मिक और आधिभौतिक अर्थ एक बात शुरुआत में स्पष्ट करना उपयोगी है— रुद्राष्टाध्यायी केवल भगवान शिव की स्तुति नहीं ह...