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Friday, May 1, 2009

मुक्तक 'श्रीकृष्ण सरल'

सैकड़ों, हजारों, लाखों आते–जाते हैं
उनके आने–जाने से पड़ता फर्क नहीं,
वे बना सकें इस दुनिया को यदि स्वर्ग नहीं
इतना तो हो, वे इसे बनाएँ नर्क नहीं।

यदि किसी एक के भी हम आँसू पोंछ सके
यदि किसी एक भूखे को रोटी जुटा सके,
सौभाग्य हमारा, यदि ऐसा कुछ कर पाए
अपनेपन का धन यदि हम सब में लुटा सकें।

हर एक व्यक्ति यह सोचे और विचारे यह
क्यों जन्म लिया, दुनिया में मैं क्यों आया हूँ,
उल्लेखनीय क्या मैंने कोई काम किया
जीवित रहकर दुनिया को क्या दे पाया हूँ।

हम जाएँ, तो हमको यह पश्चात्ताप न हो
कुछ कर न सके, हम नहीं हाथ मलते जाएँ,
हम जाएँ तो सन्तोष रहे कुछ करने का
जाते–जाते भी जग को हम फलते जाएँ।

Saturday, May 24, 2008

मत ठहरो, तुम को चलना ही चलना है ... "श्रीकृष्ण सरल"


मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है
चलने के प्रण से तुम्हें नहीं टलना है
मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।


केवल गति ही जीवन विश्रान्ति पतन है,
तुम ठहरे, तो समझो ठहरा जीवन है।
जब चलने का व्रत लिया ठहरना कैसा?
अपने हित सुख की खोज, बड़ी छलना है
मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।


तुम चलो, ज़माना अपने साथ चलाओ,
जो पिछड़ गए हैं आगे उन्हें बढ़ाओ
तुमको प्रतीक बनना है विश्व-प्रगति का
तुमको जन हित के साँंचे में ढलना है
मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।


बाधाएँ, असफलताएँ तो आती हैं
दृढ़ निश्चय लख, वे स्वयं चली जाती हैं
जितने भी रोड़े मिलें, उन्हें ठुकराओ
पथ के कांटो को पैंरो से दलना है
मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।


जो कुछ करना है, उठो ! करो! जुट जाओ !
जीवन का कोई क्षण़, मत व्यर्थ गँवाओ
कर लिया काम, भज लिया राम, यह सच है-
अवसर खोकर तो सदा हाथ मलना है
मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।

कहो नहीं करके दिखलाओ ... "श्रीकृष्ण सरल"


कहो नहीं करके दिखलाओ
उपदेशों से काम न होगा
जो उपदिष्ट वही अपनाओ
कहो नहीं, करके दिखलाओ।


अंधकार है ! अंधकार है !
क्या होगा कहते रहने से,
दूर न होगा अंधकार वह
निष्क्रिय रहने से सहने से
अंधकार यदि दूर भगाना
कहो नहीं तुम दीप जलाओ
कहो नहीं, करके दिखलाओ।


यह लोकोक्ति सुनी ही होगी
स्वर्ग देखने, मरना होगा
बात तभी मानी जाएगी
स्वयं आचरण करना होगा
पहले सीखो सबक स्वयं
फिर और किसी को सबक सिखाओ।
कहो नहीं, करके दिखलाओ।


कर्म, कर्म के लिए प्रेरणा
होते हैं उपदेश निरर्थक
साधु वृत्ति से मन को माँजो
साधु वेश परिवेश निरर्थक।
दुनिया भली बनेगी पीछे
पहले खुद को भला बनाओ।
कहो नहीं, करके दिखलाओ।।


कथनी है वाचाल कहाती
करनी रहती सदा मौन है,
मौन स्वयं अभिव्यक्ति सबल है
इसे जानता नहीं कौन है।
नहीं सहारा लो कथनी का,
करनी से ही सब समझाओ।
कहो नहीं, करके दिखलाओ।।

रुद्राष्टाध्यायी का आध्यात्मिक और आधिभौतिक अर्थ

  रुद्राष्टाध्यायी का आध्यात्मिक और आधिभौतिक अर्थ एक बात शुरुआत में स्पष्ट करना उपयोगी है— रुद्राष्टाध्यायी केवल भगवान शिव की स्तुति नहीं ह...