No more noisy, loud words from me---such is my master's will. Henceforth I deal in whispers.
अपने हाथों हारा हूँवरना किसके बस का हूँजवाब नहीं...
हम घूम चुके बस्ती-वन में इक आस का फाँस लिए मन में कोई साजन हो, कोई प्यारा हो कोई दीपक हो, कोई तारा हो जब जीवन-रात अंधेरी हो इक बार कहो तुम म...
अपने हाथों हारा हूँ
ReplyDeleteवरना किसके बस का हूँ
जवाब नहीं...