No more noisy, loud words from me---such is my master's will. Henceforth I deal in whispers.
सबकी बात न माना करखुद को भी पहचाना कर
दुनिया से लडना है तोअपनी ओर निशाना कर
या तो मुझसे आकर मिलया मुझको दीवाना कर
बारिश में औरों पर भीअपनी छतरी ताना कर
बाहर दिल की बात न लादिल को भी तहखाना कर
शहरों में हलचल ही रखमत इनको वीराना कर
हम घूम चुके बस्ती-वन में इक आस का फाँस लिए मन में कोई साजन हो, कोई प्यारा हो कोई दीपक हो, कोई तारा हो जब जीवन-रात अंधेरी हो इक बार कहो तुम म...
No comments:
Post a Comment